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mahabharat 7.25.37: तब शिखण्डी ने अपने बाणों के समूह से विकेन्द्र को आच्छादित कर दिया। आपके बलवान पुत्र ने उस मानसिक जाल को तोड़ डाला और महान यश प्राप्त करने लगा। 37॥   |   mahabharat अध्याय 7.25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 25: कौरव-पाण्डव-सैनिकोंके द्वन्द-युद्ध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.25.37 
ततस्तमिषुजालेन याज्ञसेनि: समावृणोत्।
विधूय तद् बाणजालं बभौ तव सुतो बली॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तब शिखण्डी ने अपने बाणों के समूह से विकेन्द्र को आच्छादित कर दिया। आपके बलवान पुत्र ने उस मानसिक जाल को तोड़ डाला और महान यश प्राप्त करने लगा। 37॥
 
Then Shikhandi covered Diagonal with his group of arrows. Your strong son broke that mental web and started gaining great glory. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)