श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 24: धृतराष्ट्रका अपना खेद प्रकाशित करते हुए युद्धके समाचार पूछना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.24.15 
अद्य चाप्यस्य राष्ट्रस्य हतोत्साहस्य संजय।
अवशेषं न पश्यामि ककुदे मृदिते सति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
संजय! आज इस राष्ट्र की आत्मा चकनाचूर हो गई है। नेता जी के चले जाने से मुझे किसी का जीवन शेष नहीं दिखाई देता। 15.
 
Sanjay! Today the spirit of this nation has been shattered. With the death of the leader, I do not see anyone's life left. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)