श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 24: धृतराष्ट्रका अपना खेद प्रकाशित करते हुए युद्धके समाचार पूछना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.24.10 
मध्ये राज्ञां महाबाहुं सदा युद्धाभिनन्दिनम्।
सर्वास्त्रपारगं द्रोणं कथं मृत्युरुपेयिवान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु और सब अस्त्र-शस्त्रों में निपुण, जो राजाओं में सदैव युद्ध का स्वागत करते थे, द्रोणाचार्य की मृत्यु कैसे हुई ? 10॥
 
How did Dronacharya, the mighty-armed and expert in all weapons, who always welcomed war among the kings, die? 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)