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mahabharat 7.23.92: ब्रह्माजी ने तीनों लोकों की रक्षा के लिए जो दिव्य गाण्डीव धनुष बनाया था, वह कभी नष्ट न होने वाला था और उसे अर्जुन को दिया गया था ॥92॥   |   mahabharat अध्याय 7.23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.23.92 
त्रैलोक्यरक्षणार्थाय ब्रह्मणा सृष्टमायुधम्।
तद् दिव्यमजरं चैव फाल्गुनार्थाय वै धनु:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने तीनों लोकों की रक्षा के लिए जो दिव्य गाण्डीव धनुष बनाया था, वह कभी नष्ट न होने वाला था और उसे अर्जुन को दिया गया था ॥92॥
 
The divine Gandiva bow, which would never wear out, was created by Brahma to protect the three worlds and was given to Arjuna. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)