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mahabharat 7.23.90: महाराज! राक्षस घटोत्कच की ध्वजा में गिद्ध बहुत सुन्दर लग रहा था। पूर्वकाल में रावण के रथ की तरह उसके रथ में भी इच्छानुसार दौड़ने वाले घोड़े होते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  7.23.90 
घटोत्कचस्य राजेन्द्र ध्वजे गृध्रो व्यरोचत।
अश्वाश्च कामगास्तस्य रावणस्य पुरा यथा॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राक्षस घटोत्कच की ध्वजा में गिद्ध बहुत सुन्दर लग रहा था। पूर्वकाल में रावण के रथ की तरह उसके रथ में भी इच्छानुसार दौड़ने वाले घोड़े होते थे।
 
King! The vulture looked beautiful in the flag of the demon Ghatotkacha. In the past, like Ravana's chariot, his chariot too had horses that could run as per their wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)