श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  7.23.88 
पञ्चानां द्रौपदेयानां प्रतिमा ध्वजभूषणम्।
धर्ममारुतशक्राणामश्विनोश्च महात्मनो:॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
धर्म, वायु, इन्द्र और महान अश्विन कुमारों की मूर्तियों ने क्रमशः द्रौपदी के पांचों पुत्रों के झंडों की शोभा बढ़ाई।
 
The idols of Dharma, Vayu, Indra and the great Ashvin Kumars respectively, enhanced the beauty of the flags of the five sons of Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)