श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  7.23.85 
मृदङ्गौ चात्र विपुलौ दिव्यौ नन्दोपनन्दकौ।
यन्त्रेणाहन्यमानौ च सुस्वनौ हर्षवर्धनौ॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
इस ध्वज में नन्द और उपनन्द नामक दो विशाल दिव्य डमरू लगे हुए हैं। ये बिना किसी वाद्य यंत्र के बजते हैं और मधुर ध्वनि फैलाकर सबके आनंद में वृद्धि करते हैं।
 
This flag has two huge and divine drums named Nanda and Upananda attached to it. They play without being played by any instrument and by spreading a beautiful sound they increase the joy of everyone. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)