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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण
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श्लोक 84
श्लोक
7.23.84
ध्वजं तु कुरुराजस्य पाण्डवस्य महौजस:।
दृष्टवानस्मि सौवर्णं सोमं ग्रहगणान्वितम्॥ ८४॥
अनुवाद
मैंने महान कुरुराज पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर का सुवर्णमय ध्वज देखा है जो चन्द्रमा और ग्रहों के चिह्नों से सुशोभित है ॥84॥
I have seen the golden flag of the great Kuru king Pandunandan Yudhishthira decorated with the signs of the moon and the planets. 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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