श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  7.23.82 
अतीव शुशुभे तस्य ध्वज: कृष्णाजिनोत्तर:।
कमण्डलुर्महाराज जातरूपमय: शुभ:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! काले मृगचर्म से सुशोभित उनका सुन्दर स्वर्ण ध्वज और कमण्डलु का चिह्न अत्यन्त शोभायमान हो रहा था।
 
Maharaj! His beautiful golden flag decorated with black deerskin and the symbol of kamandalu was looking very beautiful. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)