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mahabharat 7.23.6: शिखण्डीपुत्र क्षत्रदेव कमलपत्र के समान वर्ण और स्वच्छ नेत्रों वाले सुसज्जित घोड़ों को हाँकते हुए शीघ्रतापूर्वक वहाँ आये॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.23.6 
पद्मपत्रनिभांश्चाश्वान् मल्लिकाक्षान् स्वलंकृतान्।
शैखण्डि: क्षत्रदेवस्तु स्वयं प्रत्वरयन् ययौ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
शिखण्डीपुत्र क्षत्रदेव कमलपत्र के समान वर्ण और स्वच्छ नेत्रों वाले सुसज्जित घोड़ों को हाँकते हुए शीघ्रतापूर्वक वहाँ आये॥6॥
 
Kshatradeva, son of Shikhandi, himself came there quickly driving well decorated horses having complexion like lotus leaf and clear eyes. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)