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mahabharat 7.23.56: जिनका स्पर्श इन्द्र के वज्र के समान असह्य था, जिनका रंग वीरबाहुति के समान लाल था, जिनके शरीर विचित्र चिह्नों से सुशोभित थे और जो देखने में अद्भुत थे, वे घोड़े चित्रायुध को युद्धभूमि में ले गए।   |   mahabharat अध्याय 7.23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.23.56 
इन्द्राशनिसमस्पर्शा इन्द्रगोपकसंनिभा:।
काये चित्रान्तराश्चित्राश्चित्रायुधमुदावहन्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जिनका स्पर्श इन्द्र के वज्र के समान असह्य था, जिनका रंग वीरबाहुति के समान लाल था, जिनके शरीर विचित्र चिह्नों से सुशोभित थे और जो देखने में अद्भुत थे, वे घोड़े चित्रायुध को युद्धभूमि में ले गए।
 
Those horses, whose touch was unbearable like Indra's thunderbolt, whose colour was red like Veerbahuti, whose bodies were adorned with strange marks and who were wonderful to look at, took Chitrayudha to the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)