श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.23.54 
रासभारुणवर्णाभा: पृष्ठतो मूषिकप्रभा:।
वल्गन्त इव संयत्ता व्याघ्रदत्तमुदावहन्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
वह घोड़ा गधे के समान मलिन और रंगहीन था, उसकी पीठ पर चूहे के समान काली चमक थी और वह विनम्र घोड़ा उछलता-कूदता हुआ व्याघ्रदत्त को युद्ध में ले गया ॥54॥
 
The horse, which was as dirty and colorless as a donkey, had the dark glow on its back like that of a mouse, and the humble horse, took Vyaghradatta into the battle, jumping up and down. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)