श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.23.2 
संजय उवाच
ऋक्षवर्णैर्हयैर्दृष्ट्वा व्यायच्छन्तं वृकोदरम्।
रजताश्वस्तत: शूर: शैनेय: संन्यवर्तत॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! रीछ के समान रंग के घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार भीमसेन को आते देख, चाँदी के समान श्वेत घोड़ों वाले वीर सात्यकि भी पीछे लौट पड़े।
 
Sanjaya says: O King! On seeing Bhimasena arriving in a chariot drawn by horses of the colour of bears, the valiant Satyaki, who had horses as white as silver, also turned back.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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