| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण » श्लोक 17-18h |
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| | | | श्लोक 7.23.17-18h  | इन्द्रगोपकवर्णैश्च भ्रातर: पञ्च केकया:॥ १७॥
जातरूपसमाभासा: सर्वे लोहितकध्वजा:। | | | | | | अनुवाद | | केकयराज के पाँचों भाई इन्द्रगोप (वीरबाहुति) के समान रंग के घोड़ों पर सवार होकर युद्धभूमि से लौट रहे थे। पाँचों भाइयों की कान्ति सुवर्ण के समान थी और वे सब-के-सब लाल रंग की ध्वजाएँ लिए हुए थे।॥17 1/2॥ | | | | The five brothers of Kekaya prince were returning from the battlefield on horses of the same colour as Indragopa (Veerbahuti). The lustre of all the five brothers was like gold and all of them were carrying red coloured flags.॥ 17 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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