श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.23.12 
राज्ञस्त्वनन्तरो राजा पाञ्चाल्यो द्रुपदोऽभवत्।
जातरूपमयच्छत्र: सर्वैस्तैरभिरक्षित:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पांचाल नरेश द्रुपद राजा युधिष्ठिर के पीछे चल रहे थे। उनका छत्र सोने का बना था। उनकी रक्षा भी सभी सैनिक कर रहे थे।
 
Panchal king Drupada was walking behind king Yudhishthira. His umbrella was made of gold. He was also protected by all the soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)