Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.22.30: वहाँ विभिन्न रंगों के उत्तम घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथों पर पाण्डव सैनिक महान कोलाहल मचा रहे थे, जो एकमात्र द्रोणाचार्य को मारने के इरादे से लौट रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.22.30 
तत्रारावो महानासीदेकं द्रोणं जिघांसताम्।
पाण्डवानां निवृत्तानां नानावर्णैर्हयोत्तमै:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ विभिन्न रंगों के उत्तम घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथों पर पाण्डव सैनिक महान कोलाहल मचा रहे थे, जो एकमात्र द्रोणाचार्य को मारने के इरादे से लौट रहे थे।
 
There, chariots drawn by excellent horses of various colours were creating a great uproar from the Pandava soldiers who were returning with the intention of killing the one and only Dronacharya.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि द्रोणयुद्धे द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें द्रोणाचार्यका युद्धविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ३२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)