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mahabharat 7.22.28: अतः हम शीघ्रतापूर्वक उस स्थान पर चलें जहाँ द्रोणाचार्य खड़े हैं। कहीं ऐसा न हो कि कुछ भेड़िये (पाण्डव सैनिकों की भाँति) व्रत करने वाले महान हाथीरूपी द्रोणाचार्य को मार डालें॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 7.22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.22.28 
शीघ्रमनुगमिष्यामो यत्र द्रोणो व्यवस्थित:।
कोका इव महानागं मा वै हन्युर्यतव्रतम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः हम शीघ्रतापूर्वक उस स्थान पर चलें जहाँ द्रोणाचार्य खड़े हैं। कहीं ऐसा न हो कि कुछ भेड़िये (पाण्डव सैनिकों की भाँति) व्रत करने वाले महान हाथीरूपी द्रोणाचार्य को मार डालें॥ 28॥
 
Therefore, let us hurry to the place where Dronacharya is standing. It may happen that some wolves (like the Pandava soldiers) kill the great elephant-like Dronacharya who is observing fast.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)