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श्लोक  7.22.20 
विषाग्निद्यूतसंक्लेशान् वनवासं च पाण्डवा:।
स्मरमाणा न हास्यन्ति संग्राममिति मे मति:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मेरा विश्वास है कि पाण्डव आपके द्वारा दिये गये विष, दाह, द्यूत और वनवास के कष्टों को याद करके कभी भी युद्धभूमि नहीं छोड़ेंगे।
 
I believe that the Pandavas, remembering the poison given by you, the sufferings of burning, gambling and exile, will never leave the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)