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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.22.16 
एष भीमो महाक्रोधी हीन: पाण्डवसृञ्जयै:।
मदीयैरावृतो योधै: कर्ण नन्दयतीव माम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ये अत्यन्त क्रोधित भीमसेन पाण्डवों और बाणों से रहित होकर मेरे योद्धाओं से घिरे हुए हैं। कर्ण! ऐसी स्थिति में भीमसेन मुझे प्रसन्न कर रहे हैं।
 
This very angry Bhimasena is bereft of the Pandavas and the arrows and is surrounded by my warriors. Karna! In this condition Bhimasena is making me happy. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)