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mahabharat 7.22.12: मुझे विश्वास है कि वह फिर कभी युद्ध की इच्छा नहीं करेगा। जैसे वायु बड़े-बड़े वृक्षों को उखाड़ फेंकती है, वैसे ही द्रोणाचार्य ने युद्ध से उसके पैर उखाड़ दिए हैं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.22.12 
नैते जातु पुनर्युद्धमीहेयुरिति मे मति:।
यथा तु भग्ना द्रोणेन वातेनेव महाद्रुमा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मुझे विश्वास है कि वह फिर कभी युद्ध की इच्छा नहीं करेगा। जैसे वायु बड़े-बड़े वृक्षों को उखाड़ फेंकती है, वैसे ही द्रोणाचार्य ने युद्ध से उसके पैर उखाड़ दिए हैं॥12॥
 
I am sure that he will never wish for war again. Just like the wind uproots big trees, in the same way Dronacharya has uprooted his feet from the war.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)