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mahabharat 7.21.61: इस प्रकार पांचाल, मत्स्य, केकय, संजय और पाण्डव योद्धा महान् क्रोध में भर गए और महाबली द्रोणाचार्य ने उन्हें बहुत उत्तेजित कर दिया ॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.21.61 
तांस्तथा भृशसंरब्धान् पञ्चालान् मत्स्यकेकयान्।
सृञ्जयान् पाण्डवांश्चैव द्रोणो व्यक्षोभयद् बली॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पांचाल, मत्स्य, केकय, संजय और पाण्डव योद्धा महान् क्रोध में भर गए और महाबली द्रोणाचार्य ने उन्हें बहुत उत्तेजित कर दिया ॥ 61॥
 
Thus the Panchala, Matsya, Kekaya, Sanjaya and Pandava warriors were filled with great anger and were put to great agitated by the mighty Dronacharya. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)