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mahabharat 7.21.6: फिर उन्होंने अपने सारथि पर पाँच बाणों से प्रहार किया, जो सर्पविष और यमराज के विष के समान घातक थे। उन बाणों के आघात से द्रोणाचार्य का सारथि मूर्छित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.21.6 
तथास्य सारथे: पञ्च शरान् सर्पविषोपमान्।
अमुञ्चदन्तकप्रख्यान् सम्मुमोहास्य सारथि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने अपने सारथि पर पाँच बाणों से प्रहार किया, जो सर्पविष और यमराज के विष के समान घातक थे। उन बाणों के आघात से द्रोणाचार्य का सारथि मूर्छित हो गया।
 
Then he attacked his charioteer with five arrows which were as deadly as snake venom and Yamaraja's venom. Dronacharya's charioteer fell unconscious due to the blow of those arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)