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mahabharat 7.21.58: तब राजाओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर को उनके गुरु के पास से वेगवान घोड़ों द्वारा भगा दिया गया और पांचाल देश का एक राजकुमार द्रोण का सामना करने के लिए आगे बढ़ा।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.21.58 
ततो युधिष्ठिर: क्षिप्रं गुरुतो राजसत्तम:।
अपायाज्जवनैरश्वै: पाञ्चाल्यो द्रोणमभ्ययात्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
तब राजाओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर को उनके गुरु के पास से वेगवान घोड़ों द्वारा भगा दिया गया और पांचाल देश का एक राजकुमार द्रोण का सामना करने के लिए आगे बढ़ा।
 
Then Yudhishthira, that best of kings, was quickly driven away from his teacher by swift horses, and a prince of the Panchala country advanced to face Drona.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)