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mahabharat 7.21.57: चौसठ बाणों से युधामन्यु को और तीस बाणों से सात्यकि को घायल करके स्वर्णमय रथ पर सवार द्रोणाचार्य राजा युधिष्ठिर की ओर दौड़े ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  7.21.57 
युधामन्युं चतु:षष्टॺा त्रिंशता चैव सात्यकिम्।
विद्‍ध्वा रुक्मरथस्तूर्णं युधिष्ठिरमुपाद्रवत्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
चौसठ बाणों से युधामन्यु को और तीस बाणों से सात्यकि को घायल करके स्वर्णमय रथ पर सवार द्रोणाचार्य राजा युधिष्ठिर की ओर दौड़े ॥57॥
 
After wounding Yudhamanyu with sixty-four arrows and Satyaki with thirty arrows, Dronacharya of the golden chariot ran towards King Yudhishthira. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)