Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.21.54: यद्यपि वे शत्रुओं की सेना में घुसकर सब दिशाओं में विचरण कर रहे थे, तथापि वे दूसरों के रक्षक थे और स्वयं किसी से भी रक्षित नहीं थे ॥ 54॥ | mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मध्यं प्राप्य सैन्यानां सर्वा: प्रविचरन् दिश:।
त्राता ह्यभवदन्येषां न त्रातव्य: कथञ्चन॥ ५४॥
अनुवाद
यद्यपि वे शत्रुओं की सेना में घुसकर सब दिशाओं में विचरण कर रहे थे, तथापि वे दूसरों के रक्षक थे और स्वयं किसी से भी रक्षित नहीं थे ॥ 54॥
Although He had entered the enemy's army and was roaming in all directions, yet He was the protector of others and He Himself was not in any way protected by anyone. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥