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mahabharat 7.21.36: हे भरतपुत्र! युद्ध में तीव्र गति से चलने वाले आचार्य की ध्वजा पर जो वेदी का चिह्न था, वह हमें हिमालय की चोटी के समान शोभायमान प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.21.36 
शोभमानां ध्वजे चास्य वेदीमद्राक्ष्म भारत।
हिमवच्छिखराकारां चरत: संयुगे भृशम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! युद्ध में तीव्र गति से चलने वाले आचार्य की ध्वजा पर जो वेदी का चिह्न था, वह हमें हिमालय की चोटी के समान शोभायमान प्रतीत हो रहा था।
 
O son of Bharata! The symbol of the altar on the flag of the Acharya, who was moving rapidly in the war, appeared to us as majestic as the peak of the Himalayas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)