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mahabharat 7.21.35: जैसे बादलों में बिजली चमकती है, वैसे ही हम महातेजस्वी द्रोणाचार्य के सुवर्ण-मंडित धनुष को सब दिशाओं में चमकते हुए देख सकते थे ॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.21.35 
तस्य विद्युदिवाभ्रेषु चापं हेमपरिष्कृतम्।
दिक्षु सर्वासु पश्यामो द्रोणस्यामिततेजस:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादलों में बिजली चमकती है, वैसे ही हम महातेजस्वी द्रोणाचार्य के सुवर्ण-मंडित धनुष को सब दिशाओं में चमकते हुए देख सकते थे ॥ 35॥
 
Just as lightning flashes in the clouds, we could see the golden-decorated bow of the immensely illustrious Dronacharya shining in all directions. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)