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mahabharat 7.21.34: शक्तिशाली, पराक्रमी, महान धनुर्धर और अपने मित्रों को सुरक्षा प्रदान करने वाले द्रोणाचार्य समस्त सेना में कोलाहल मचाते हुए सभी दिशाओं में विचरण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.21.34 
सर्वा दिश: समचरत् सैन्यं विक्षोभयन्निव।
बली शूरो महेष्वासो मित्राणामभयंकर:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
शक्तिशाली, पराक्रमी, महान धनुर्धर और अपने मित्रों को सुरक्षा प्रदान करने वाले द्रोणाचार्य समस्त सेना में कोलाहल मचाते हुए सभी दिशाओं में विचरण कर रहे थे।
 
Dronacharya, who is powerful, valiant, a great archer and one who gives protection to his friends, was moving in all directions, causing a commotion in the entire army. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)