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mahabharat 7.21.33: जैसे शीत ऋतु के अन्त में गरजता हुआ बादल पत्थर बरसाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य ने अपने शत्रुओं पर बाणों की वर्षा करके उन्हें भयभीत कर दिया ॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.21.33 
नानद्यमान: पर्जन्यो मिश्रवातो हिमात्यये।
अश्मवर्षमिवावर्षत् परेषां भयमादधत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जैसे शीत ऋतु के अन्त में गरजता हुआ बादल पत्थर बरसाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य ने अपने शत्रुओं पर बाणों की वर्षा करके उन्हें भयभीत कर दिया ॥ 33॥
 
Just as a thundering cloud rains stones at the end of the winter season, Dronacharya showered arrows upon his enemies, frightening them. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)