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mahabharat 7.21.29: इस प्रकार मत्स्य देश के योद्धाओं को पराजित करने के पश्चात् भारद्वाज के पुत्र द्रोणाचार्य ने चेदि, करुष, केकय, पांचाल, सृंजय तथा पाण्डव सैनिकों को बार-बार परास्त किया।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.21.29 
मत्स्याञ्जित्वाऽजयच्चेदीन् करूषान् केकयानपि।
पञ्चालान् सृञ्जयान् पाण्डून् भारद्वाज: पुन: पुन:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मत्स्य देश के योद्धाओं को पराजित करने के पश्चात् भारद्वाज के पुत्र द्रोणाचार्य ने चेदि, करुष, केकय, पांचाल, सृंजय तथा पाण्डव सैनिकों को बार-बार परास्त किया।
 
In this manner, after defeating the warriors of Matsya country, Bharadvajana's son Dronacharya repeatedly defeated the Chedis, Karushas, ​​Kekayas, Panchalas, Srinjayas and the Pandava soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)