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mahabharat 7.21.26: फिर उसने जोर से गर्जना की और फिर छः बाणों से द्रोणाचार्य को उनके सारथि और घोड़ों सहित घायल कर दिया, जो किसी शिल्पी द्वारा साफ किये हुए सूर्य की किरणों के समान चमकते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.21.26 
सूर्यरश्मिप्रतीकाशै: कर्मारपरिमार्जितै:।
षड्‍‍भि: ससूतं सहयं द्रोणं विद्‍ध्वानदद् भृशम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने जोर से गर्जना की और फिर छः बाणों से द्रोणाचार्य को उनके सारथि और घोड़ों सहित घायल कर दिया, जो किसी शिल्पी द्वारा साफ किये हुए सूर्य की किरणों के समान चमकते थे।
 
He roared loudly and then wounded Dronacharya along with his charioteer and horses with six arrows, which were as bright as the rays of the sun, cleaned by a craftsman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)