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mahabharat 7.21.24: तदनन्तर शत्रु सेना का संहार करने वाले द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर को पकड़ने के लिए उन सब सैनिकों को उसी प्रकार नष्ट कर दिया, जैसे आग रूई के ढेर को जला देती है।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.21.24 
ततो युधिष्ठिरं प्रेप्सुराचार्य: शत्रुपूगहा।
व्यधमत् तान्यनीकानि तूलराशिमिवानल:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर शत्रु सेना का संहार करने वाले द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर को पकड़ने के लिए उन सब सैनिकों को उसी प्रकार नष्ट कर दिया, जैसे आग रूई के ढेर को जला देती है।
 
Then, in order to capture Yudhishthira, Dronacharya, that destroyer of enemy forces, annihilated all those soldiers just as fire burns a heap of cotton.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)