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mahabharat 7.21.2: उस समय युधिष्ठिर की सेना में बड़ा कोलाहल मच गया। जिस प्रकार एक विशाल सिंह हाथियों के सरदारों को बंदी बनाना चाहता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य युधिष्ठिर को वश में करना चाहते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.21.2 
ततो हलहलाशब्द आसीद् यौधिष्ठिरे बले।
जिघृक्षति महासिंहे गजानामिव यूथपम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय युधिष्ठिर की सेना में बड़ा कोलाहल मच गया। जिस प्रकार एक विशाल सिंह हाथियों के सरदारों को बंदी बनाना चाहता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य युधिष्ठिर को वश में करना चाहते थे।
 
At that time, there was a great uproar in Yudhishthira's army. Just as a giant lion wants to capture the leaders of the elephants, in the same way Dronacharya wanted to control Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)