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mahabharat 7.21.12: उस युद्धस्थल में सत्यजित के बाणों से द्रोणाचार्य को मारा जाता देख पांचाल योद्धा वृक ने भी सैकड़ों तीखे बाणों की वर्षा करके द्रोणाचार्य को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.21.12 
दृष्ट्वा सत्यजिता द्रोणं ग्रस्यमानमिवाहवे।
वृक: शरशतैस्तीक्ष्णै: पाञ्चाल्यो द्रोणमार्दयत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धस्थल में सत्यजित के बाणों से द्रोणाचार्य को मारा जाता देख पांचाल योद्धा वृक ने भी सैकड़ों तीखे बाणों की वर्षा करके द्रोणाचार्य को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई।
 
On that battlefield, seeing Dronacharya being killed by Satyajit's arrows, the Panchala warrior Vrik also inflicted immense pain on Dronacharya by shooting hundreds of sharp arrows at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)