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mahabharat 7.21.11: महाराज! धनुष कट जाने पर वीर योद्धा सत्यजित ने शीघ्रता से दूसरा धनुष लिया और कंककी पंखों से तीस बाण चलाकर द्रोणाचार्य को गहरे घाव पहुँचा दिए।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.21.11 
स शीघ्रतरमादाय धनुरन्यत् प्रतापवान्।
द्रोणमभ्यहनद् राजंस्त्रिंशता कङ्कपत्रिभि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाराज! धनुष कट जाने पर वीर योद्धा सत्यजित ने शीघ्रता से दूसरा धनुष लिया और कंककी पंखों से तीस बाण चलाकर द्रोणाचार्य को गहरे घाव पहुँचा दिए।
 
King! After his bow was cut, the valiant warrior Satyajit quickly took another bow and shot thirty arrows with Kankki feathers to inflict deep wounds on Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)