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mahabharat 7.21.10: तत्पश्चात् आचार्य ने सत्यजित के धनुष को उसके बाणों सहित काट डाला और शीघ्रतापूर्वक दस तीखे बाणों से उसके प्राण-स्थानों को छेदकर उसे घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.21.10 
तत: सत्यजितं तीक्ष्णैर्दशभिर्मर्मभेदिभि:।
अविध्यच्छीघ्रमाचार्यश्छित्त्वास्य सशरं धनु:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आचार्य ने सत्यजित के धनुष को उसके बाणों सहित काट डाला और शीघ्रतापूर्वक दस तीखे बाणों से उसके प्राण-स्थानों को छेदकर उसे घायल कर दिया।
 
Thereafter the Acharya cut off Satyajit's bow along with his arrows and quickly wounded him with ten sharp arrows that pierced his vital spots.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)