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mahabharat 7.202.96-97: ब्रह्माजी बोले - हे प्रभु! आप ही यज्ञ हैं, आप ही इस जगत के आधार हैं, आप ही सबको आश्रय देने वाले हैं, आप ही सबकी सृष्टि करने वाले हैं, आप ही महादेव हैं और आप ही परमधाम तथा परमपद हैं। आपने इस सम्पूर्ण चराचर जगत् को व्याप्त कर रखा है॥96-97॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.96-97 
ब्रह्मोवाच
त्वं यज्ञो भुवनस्यास्य त्वं गतिस्त्वं परायणम्॥ ९६॥
त्वं भवस्त्वं महादेवस्त्वं धाम परमं पदम्।
त्वया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजङ्गमम्॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - हे प्रभु! आप ही यज्ञ हैं, आप ही इस जगत के आधार हैं, आप ही सबको आश्रय देने वाले हैं, आप ही सबकी सृष्टि करने वाले हैं, आप ही महादेव हैं और आप ही परमधाम तथा परमपद हैं। आपने इस सम्पूर्ण चराचर जगत् को व्याप्त कर रखा है॥96-97॥
 
Brahmaji said - O Lord! You are the sacrifice, you are the support of this world, you are the one who gives shelter to everyone, you are the one who creates everyone, you are Mahadev and you are the supreme abode and the supreme position. You have pervaded this entire animate and inanimate world.॥96-97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)