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mahabharat 7.202.87-88: देवताओं ने ब्रह्माजी को प्रणाम करके सिर झुकाया और हाथ जोड़कर कहा, 'ब्रह्मन्! पार्वती की गोद में बालक के रूप में एक अद्भुत प्राणी था, जिसे हम देखकर भी पहचान नहीं पाए हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 87-88
 
 
श्लोक  7.202.87-88 
ते तं प्रणम्य शिरसा प्रोचु: प्राञ्जलयस्तदा॥ ८७॥
किमप्यङ्कगतं ब्रह्मन् पार्वत्या भूतमद्भुतम्।
बालरूपधरं दृष्ट्वा नास्माभिरभिलक्षित:॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने ब्रह्माजी को प्रणाम करके सिर झुकाया और हाथ जोड़कर कहा, 'ब्रह्मन्! पार्वती की गोद में बालक के रूप में एक अद्भुत प्राणी था, जिसे हम देखकर भी पहचान नहीं पाए हैं।
 
The Gods bowed their heads in salutation to Brahma and with folded hands said, 'Brahman! There was a wonderful creature in the form of a child in Parvati's lap, whom we have not been able to identify even after seeing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)