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mahabharat 7.202.86-87h: तत्पश्चात्, अपनी भुजा को क्षीण करके, देवताओं सहित इन्द्र तुरन्त वहाँ से अविनाशी भगवान ब्रह्मा के पास चले गये।   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  7.202.86-87h 
तत: स स्तम्भितभुज: शक्रो देवगणैर्वृत:॥ ८६॥
जगाम ससुरस्तूर्णं ब्रह्माणं प्रभुमव्ययम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, अपनी भुजा को क्षीण करके, देवताओं सहित इन्द्र तुरन्त वहाँ से अविनाशी भगवान ब्रह्मा के पास चले गये।
 
Thereafter, with his arm paralyzed, Indra along with the gods immediately went from there to the immortal Lord Brahma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)