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न पद्भ्यां स्पृशते भूमिं न च शूलं विमुञ्चति।
शूलाच्छूलसहस्राणि निष्पेतुस्तस्य तेजसा॥ ८॥
अनुवाद
वह कभी ज़मीन पर पैर नहीं रखते थे। हाथ में त्रिशूल कभी नहीं छोड़ते थे। उनके तेज से उस एक त्रिशूल से हज़ारों नए त्रिशूल प्रकट होकर शत्रुओं पर टूट पड़ते थे।
He never touched the ground with his feet. He never left the trident in his hand. Due to his brilliance, thousands of new tridents would appear from that one trident and fall on the enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥