Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.202.70-73: देवताओं की यह बात सुनकर भगवान शिव ने 'तथास्तु' कहकर उनके कल्याण की कामना से गंधमादन और विंध्याचल इन दो पर्वतों को अपने रथ की दो पार्श्व ध्वजाएँ बनायीं। फिर उन्होंने समुद्र और पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को रथ बनाया और नागराज शेष को उस रथ की धुरी बनाया। तत्पश्चात त्रिनेत्रधारी पिनाकपाणि देवाधिदेव महादेव ने चन्द्रमा और सूर्य दोनों को रथ के दो पहिये बना दिये। एलापत्र और पुष्पदंत के पुत्र को जूए की कीलें बनाया। फिर त्र्यम्बक ने मलयालचलक यूप और तक्षक नाग को जूए में बाँधने के लिए रस्सी बनायी। 70-73॥ | mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तथोक्तस्तथेत्युक्त्वा देवानां हितकाम्यया॥ ७०॥
गन्धमादनविन्ध्यौ च कृत्वा वंशध्वजौ हर:।
पृथ्वीं ससागरवनां रथं कृत्वा तु शङ्कर:॥ ७१॥
अक्षं कृत्वा तु नागेन्द्रं शेषं नाम त्रिलोचन:।
चक्रे कृत्वा तु चन्द्रार्कौ देवदेव: पिनाकधृक्॥ ७२॥
अणी कृत्वैलपत्रं च पुष्पदन्तं च त्र्यम्बक:।
यूपं कृत्वा तु मलयमवनाहं च तक्षकम्॥ ७३॥
अनुवाद
देवताओं की यह बात सुनकर भगवान शिव ने 'तथास्तु' कहकर उनके कल्याण की कामना से गंधमादन और विंध्याचल इन दो पर्वतों को अपने रथ की दो पार्श्व ध्वजाएँ बनायीं। फिर उन्होंने समुद्र और पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को रथ बनाया और नागराज शेष को उस रथ की धुरी बनाया। तत्पश्चात त्रिनेत्रधारी पिनाकपाणि देवाधिदेव महादेव ने चन्द्रमा और सूर्य दोनों को रथ के दो पहिये बना दिये। एलापत्र और पुष्पदंत के पुत्र को जूए की कीलें बनाया। फिर त्र्यम्बक ने मलयालचलक यूप और तक्षक नाग को जूए में बाँधने के लिए रस्सी बनायी। 70-73॥
On hearing this from the gods, Lord Shiva said 'Tathaastu' and wishing for their welfare, made the two mountains Gandhamadan and Vindhyachal as the two side flags of his chariot. Then he made the entire earth including the sea and the mountains into a chariot and made Nagraj Shesh the axle of that chariot. After that, Pinakpani Devadhidev Mahadev, having three eyes, made both the moon and the sun into two wheels of the chariot. The son of Elapatra and Pushpadanth were made the nails of the yoke. Then Trimbak made Malayalachalka Yup and Takshak Naga into a rope to tie the yoke. 70-73॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥