Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.202.62-63: राजा! सभी देवता भयभीत होकर भगवान शंकर की शरण में आये। फिर उनका क्रोध शांत होने पर उन्होंने यज्ञ पूर्ण किया। उन दिनों देवतागण भाग गये थे, तब से लेकर आज तक वे देवता उनसे भयभीत रहते हैं। 62-63। | mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भयेन त्रिदशा राजञ्छरणं च प्रपेदिरे॥ ६२॥
तेन चैवातिकोपेन स यज्ञ: संधितस्तदा।
भग्नाश्चापि सुरा आसन् भीताश्चाद्यापि तं प्रति॥ ६३॥
अनुवाद
राजा! सभी देवता भयभीत होकर भगवान शंकर की शरण में आये। फिर उनका क्रोध शांत होने पर उन्होंने यज्ञ पूर्ण किया। उन दिनों देवतागण भाग गये थे, तब से लेकर आज तक वे देवता उनसे भयभीत रहते हैं। 62-63।
King! All the gods were frightened and came to the shelter of Lord Shankar. Then after his anger was pacified, he completed the yagya. In those days, the gods had fled away, since then till today those gods are afraid of him. 62-63.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥