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mahabharat 7.202.60: तत्पश्चात् सब देवता भय से काँपते हुए यज्ञकुण्ड से बाहर निकल आए। तब भगवान शिव ने देवताओं पर तीक्ष्ण एवं चमकते हुए बाण चलाए॥60॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  7.202.60 
ततो निश्चक्रमुर्देवा वेपमाना नता: स्म ते।
पुनश्च संदधे दीप्तान् देवानां निशिताञ्शरान्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सब देवता भय से काँपते हुए यज्ञकुण्ड से बाहर निकल आए। तब भगवान शिव ने देवताओं पर तीक्ष्ण एवं चमकते हुए बाण चलाए॥60॥
 
Thereafter, all the gods bowed down and came out of the sacrificial fire, trembling with fear. Then Lord Shiva aimed sharp and dazzling arrows at the gods. 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)