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mahabharat 7.202.55: पार्थ! उनके धनुष की टंकार से अत्यंत व्याकुल होकर समस्त जगत उनके वश में आ गया। सभी देवता और दानव भूमि पर गिर पड़े॥55॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.202.55 
तेन ज्यातलघोषेण सर्वे लोका: समाकुला:।
बभूवुर्वशगा: पार्थ निपेतुश्च सुरासुरा:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! उनके धनुष की टंकार से अत्यंत व्याकुल होकर समस्त जगत उनके वश में आ गया। सभी देवता और दानव भूमि पर गिर पड़े॥55॥
 
Partha! Extremely perturbed by the deep sound of his bowstring, the entire universe came under his control. All the gods and demons fell on the ground. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)