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mahabharat 7.202.5: हे महामुनि! वे हाथ में जलता हुआ भाला लेकर जिस ओर जाते, मेरे शत्रु उसी ओर छिद जाते थे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.202.5 
ज्वलन्तं शूलमुद्यम्य यां दिशं प्रतिपद्यते।
तस्यां दिशि विदीर्यन्ते शत्रवो मे महामुने॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! वे हाथ में जलता हुआ भाला लेकर जिस ओर जाते, मेरे शत्रु उसी ओर छिद जाते थे॥5॥
 
O great sage! Whichever direction he went with the burning spear in his hand, my enemies were pierced in that direction. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)