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mahabharat 7.202.46: अनेक रूप वाले शिव को नमस्कार है, अनेक धनुष धारण करने वाले रुद्रदेव को नमस्कार है, आप जो स्थाणु रूप हैं, आपको नमस्कार है, उन तपस्वी शिव को सदैव नमस्कार है ॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.202.46 
नमोऽस्तु बहुरूपाय नमोऽस्तु बहुधन्विने।
नमोऽस्तु स्थाणवे नित्यं नमस्तस्मै तपस्विने॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
अनेक रूप वाले शिव को नमस्कार है, अनेक धनुष धारण करने वाले रुद्रदेव को नमस्कार है, आप जो स्थाणु रूप हैं, आपको नमस्कार है, उन तपस्वी शिव को सदैव नमस्कार है ॥ 46॥
 
Salutations to Shiva who has many forms, salutations to Rudradev who holds many bows, you who are in the form of Sthanu, salutations to you, salutations to that ascetic Shiva always. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)