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mahabharat 7.202.43-45: जिनके मित्र कुबेर हैं, उन भगवान शिव को नमस्कार है। हे प्रभु! आप उत्तम वस्त्र, उत्तम व्रत और उत्तम धनुष धारण करते हैं। आप धनुष को प्रिय करने वाले धनुर्धर देव हैं। आप धन्वी, धन्वंतर, धनु और धन्वाचार्य हैं। आपको नमस्कार है। देवों में श्रेष्ठ, भयंकर अस्त्र धारण करने वाले महादेव जी को नमस्कार है। ॥43-45॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 43-45
 
 
श्लोक  7.202.43-45 
नमस्तस्मै सुरेशाय यस्य वैश्रवण: सखा॥ ४३॥
सुवाससे नमस्तुभ्यं सुव्रताय सुधन्विने।
धनुर्धराय देवाय प्रियधन्वाय धन्विने॥ ४४॥
धन्वन्तराय धनुषे धन्वाचार्याय ते नम:।
उग्रायुधाय देवाय नम: सुरवराय च॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जिनके मित्र कुबेर हैं, उन भगवान शिव को नमस्कार है। हे प्रभु! आप उत्तम वस्त्र, उत्तम व्रत और उत्तम धनुष धारण करते हैं। आप धनुष को प्रिय करने वाले धनुर्धर देव हैं। आप धन्वी, धन्वंतर, धनु और धन्वाचार्य हैं। आपको नमस्कार है। देवों में श्रेष्ठ, भयंकर अस्त्र धारण करने वाले महादेव जी को नमस्कार है। ॥43-45॥
 
Salutations to Lord Shiva, whose friend is Kubera. O Lord! You wear the best clothes, the best fasts and the best bow. You are the archer god who loves the bow. You are Dhanvi, Dhanvantar, Dhanu and Dhanvacharya. Salutations to you. Salutations to Mahadev Ji, the best of the gods, who carries a fearsome weapon. ॥ 43-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)