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श्लोक  7.202.4 
अर्जुन उवाच
संग्रामे न्यहनं शत्रून् शरौघैर्विमलैरहम्।
अग्रतो लक्षये यान्तं पुरुषं पावकप्रभम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - महर्षि! जब मैं अपने निर्मल बाणों से शत्रु सेना का संहार कर रहा था, तब मैंने अग्नि के समान तेजस्वी एक पुरुष को अपने आगे-आगे चलते देखा।
 
Arjun said - Maharshi! When I was killing the enemy army with my pure arrows, I saw a person as radiant as fire walking ahead of me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)