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mahabharat 7.202.35: जिनका शरीर वृक्षों से आच्छादित है, जो सेना के सेनापति और शरीर के मध्यस्थ हैं, जो यजमान के रूप में हाथ में स्रुवा धारण करते हैं, जो दिव्य स्वरूप, धनुर्धर और भृगुवंशी परशुराम के स्वरूप हैं, उनको नमस्कार है॥35॥   |   mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.202.35 
वृक्षैरावृतकायाय सेनान्ये मध्यमाय च।
स्रुवहस्ताय देवाय धन्विने भार्गवाय च॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जिनका शरीर वृक्षों से आच्छादित है, जो सेना के सेनापति और शरीर के मध्यस्थ हैं, जो यजमान के रूप में हाथ में स्रुवा धारण करते हैं, जो दिव्य स्वरूप, धनुर्धर और भृगुवंशी परशुराम के स्वरूप हैं, उनको नमस्कार है॥35॥
 
Salutations to him whose body is covered with trees, who is the commander of the army and the mediator of the body, who holds Sruva in his hand in the form of a host, who is the divine form, the archer and the form of Parashuram of Bhrigu dynasty. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)