Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.202.30-31: जो यम के अनुकूल हैं, जो अव्यक्त कालस्वरूप हैं, जिनके केश आकाश हैं, जो सदाचारी हैं, जो सबका कल्याण करते हैं, जो सुन्दर हैं, जिनके नेत्र लाल हैं, जो सदैव स्थिर रहते हैं और जो सर्वज्ञ हैं, जिनके केश भूरे और लाल रंग के हैं, जिनका सिर मुंडा हुआ है, जो दुबले-पतले हैं और जो भवसागर से पार उतारते हैं, जो सूर्यस्वरूप हैं, श्रेष्ठ तीर्थ हैं और जो अत्यंत वेगवान हैं, उन परमेश्वर महादेव को नमस्कार है॥30-31॥ | mahabharat अध्याय 7.202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो यम के अनुकूल हैं, जो अव्यक्त कालस्वरूप हैं, जिनके केश आकाश हैं, जो सदाचारी हैं, जो सबका कल्याण करते हैं, जो सुन्दर हैं, जिनके नेत्र लाल हैं, जो सदैव स्थिर रहते हैं और जो सर्वज्ञ हैं, जिनके केश भूरे और लाल रंग के हैं, जिनका सिर मुंडा हुआ है, जो दुबले-पतले हैं और जो भवसागर से पार उतारते हैं, जो सूर्यस्वरूप हैं, श्रेष्ठ तीर्थ हैं और जो अत्यंत वेगवान हैं, उन परमेश्वर महादेव को नमस्कार है॥30-31॥
Salutations to that Lord Mahadev who is in the favour of Yama, who is the unmanifested form of time, whose hair is the sky, who is of virtuous conduct, who does good to all, who is beautiful, has red eyes, who is always stable and who is omniscient, whose hair is brown and red in colour, whose head is shaven, who is slim and who helps one cross the ocean of life, who is in the form of the Sun, the best pilgrimage place and who is extremely swift, that Supreme Lord Mahadev. ॥30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥